रक्षाबंधन ऐड कर बुरी फंसी कृति सेनन, विवाद बढ़ने के बाद कैंपेन ब्रांड ने हटाया विज्ञापन
punjabkesari.in Wednesday, Aug 26, 2026 - 12:31 PM (IST)
नारी डेस्क: रक्षाबंधन के एक हालिया विज्ञापन में अपनी ड्रेस की आलोचना करने वाले ट्रोलर्स को जवाब देने के एक दिन बाद, खुद ब्रांड ने ही कैंपेन को हटा लिया है। ब्रांड का कहना है कि वे भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का बहुत सम्मान करते हैं। कृति ने 25 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि किसी भी त्योहार का असली मतलब भावनाओं में होता है, न कि हम जो कपड़े पहनते हैं उनमें। रक्षाबंधन के लिए एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में उन्हें ऑफ-व्हाइट ड्रेस पहने देखा गया था, जिसमें ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी।

ब्रांड ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर एक बयान शेयर किया, जिसमें कहा गया कि वे भारतीय संस्कृति का बहुत सम्मान करते हैं। कृति ने लिखा- "हम भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का बहुत सम्मान करते हैं। एक ब्रांड के तौर पर, हम हमेशा पूरे परिवार के साथ इन खुशी के पलों को मनाने में विश्वास रखते हैं और इस बार हम अपने पालतू जानवरों तक भी यह प्यार और जश्न पहुंचाना चाहते थे। अगर हमारे हालिया विज्ञापन से अनजाने में समाज के कुछ वर्गों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो हमारा ऐसा कोई इरादा बिल्कुल नहीं था। सम्मान के तौर पर, हमने उस विज्ञापन को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। इस त्योहार के मौसम में आप सभी को ढेर सारा प्यार और सकारात्मकता मिले!"
हटाए गए इस विज्ञापन को लेकर ऑनलाइन बड़ी बहस छिड़ गई थी, जिसमें बहुत से लोगों का कहना था कि पारंपरिक भारतीय त्योहार से जुड़े कैंपेन के लिए कृति की ड्रेस सही नहीं थी। कृति ने फोटो-शेयरिंग ऐप पर लिखा- "त्योहारों का असली मतलब आपके पहने हुए कपड़ों में नहीं, बल्कि परंपराओं के प्रति आपकी भावनाओं और उनके अर्थ में होता है। रक्षाबंधन सुरक्षा का बंधन है। मैं और मेरी बहन एक-दूसरे को राखी बांधते हैं।" "हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे की सुरक्षा वैसे ही कर सकते हैं जैसे कोई भाई करता। हम एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं। और हमारे लिए, यह प्रार्थना और वादा हमारे कुत्तों के लिए भी है! आखिरकार वे भी परिवार का हिस्सा हैं!" 'कॉकटेल 2' की एक्ट्रेस ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी महिला के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके पहने हुए कपड़ों से नहीं आंका जाना चाहिए।साथ ही हम महिलाओं को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए??
नोट में आगे कहा गया- एथनिक फ़ैशन में समय के साथ काफ़ी बदलाव आया है लेकिन आज भी किसी महिला के कल्चर के प्रति सम्मान को सिर्फ़ उसके कपड़ों से ही आंका जाता है!! कल्चर और परंपराएं उसके दिल में होती हैं, न कि उसके कपड़ों के गले के डिज़ाइन में!" । 24 अगस्त को कंगना रनौत ने भी कृति पर तंज कसते हुए कहा कि भले ही महिलाओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आज़ादी है, फिर भी उन्हें कुछ मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। 'तनु वेड्स मनु' की एक्ट्रेस ने लिखा- "एक महिला होने के नाते यह बहुत अच्छा समय है, हमारे वॉर्डरोब में तरह-तरह के कपड़े हैं। आज की महिला ग्लोबल है - कॉकटेल ड्रेस से लेकर लहंगा-चोली, जींस से लेकर साड़ी, बिकिनी से लेकर सलवार-कमीज़ तक - इतने सारे ऑप्शन होने के बावजूद आप बिकिनी या अंडरगारमेंट्स पहनकर अपने भाई को राखी क्यों बांधेंगी?"

