भादो माह शुरू, अब आएंगे जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े पर्व, जानें सही तारीख और पूजा मुहूर्त

punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 04:17 PM (IST)

नारी डेस्क: सावन का महीना अब विदा हो चुका है और आज से भाद्रपद यानी भादो माह की शुरुआत हो गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। धार्मिक नजरिए से यह महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश के जन्मोत्सव जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं। भादो आते ही मंदिरों और घरों में त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस महीने एक ओर जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारे सुनाई देंगे, वहीं कुछ दिनों बाद गणेश चतुर्थी के साथ 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज भी चारों तरफ सुनाई देगी। इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा असमंजस है। कुछ लोग 3 सितंबर को व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णव परंपरा में यह पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं भादो महीने में आने वाले इन दोनों प्रमुख पर्वों की सही तारीख, पूजा का शुभ समय और इनके धार्मिक महत्व के बारे में।

भादो का महीना क्यों माना जाता है खास

हिंदू धर्म में भाद्रपद महीने को व्रत, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना गया है। इसी महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर भक्त व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा करते हैं। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इसी महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और ज्ञान, बुद्धि तथा कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

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2026 में कब मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दो अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिल रही हैं। गृहस्थ और स्मार्त परंपरा का पालन करने वाले लोग गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे और रात में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे। वहीं वैष्णव संप्रदाय और इस्कॉन जैसी संस्थाओं में शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। दोनों तिथियां अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार मान्य हैं। तारीख में यह अंतर अलग-अलग संप्रदायों द्वारा तिथि और व्रत के नियमों को मानने की वजह से होता है।

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जन्माष्टमी पर कब होगी कृष्ण जन्म की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा रात में ही की जाती है। 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक का समय भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव और पूजा के लिए शुभ बताया गया है। इसी दौरान भक्त बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाएंगे, उनका विधिवत पूजन करेंगे और उन्हें भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखने और भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

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2026 में कब है गणेश चतुर्थी

भगवान गणेश के भक्तों को भी ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके अलावा शहरों में बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। गणपति स्थापना के साथ ही पूरे माहौल में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजने लगते हैं।गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश की नियमित पूजा की जाती है और भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें मोदक, लड्डू और अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं।

गणेश जी की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व

भगवान गणेश को किसी भी शुभ काम से पहले पूजे जाने वाले देवता माना जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी ऐसा देवता जो भक्तों के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। उनकी आराधना से बुद्धि, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति होती है और नए कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

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इस तरह भाद्रपद का महीना धार्मिक उत्सवों से भरपूर रहने वाला है। पहले जन्माष्टमी पर कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा और फिर गणेश चतुर्थी के साथ बप्पा का स्वागत होगा। यही वजह है कि भादो माह को हिंदू धर्म में भक्ति और उत्सव का विशेष महीना माना जाता है। 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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