कानपुर का 200 साल पुराना मंदिर, जहां जीवित सांपों से होता है शिवलिंग का श्रृगांर

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 05:59 PM (IST)

नारी डेस्क:   उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित श्री नंदेश्वर धाम एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है और हाथीगांव, सरसौल विकासखंड में स्थित है। यहाँ भगवान शिव का अद्भुत अर्धनारीश्वर स्वरूप वाला शिवलिंग है, जिसे विशेष अवसरों पर जीवित सांपों से सजाया जाता है।

महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा

मंदिर की सबसे खास परंपरा महाशिवरात्रि के तीसरे दिन होती है। इस दिन स्थानीय सांप पकड़ने वाले जंगल से सांप लाते हैं और उनका उपयोग शिवलिंग को सजाने के लिए किया जाता है।

पूजा की प्रक्रिया इस प्रकार होती है

पहले शिवलिंग को पारंपरिक फूलों, बेलपत्र और अन्य पूजा सामग्री से सजाया जाता है। इसके बाद सांपों को सावधानीपूर्वक शिवलिंग के आसपास छोड़ा जाता है। सांप स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और कभी-कभी शिवलिंग पर लिपट जाते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद, सांपों को सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है। कन्नौज के अनुभवी सपेरे जैसे रामपाल नाथ इस प्रक्रिया को कई वर्षों से संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि सांप भगवान शिव का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं और पूजा में उन्हें शामिल करने से कोई नुकसान नहीं होता।

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परंपरा का महत्व और इतिहास

यह अनोखी परंपरा पिछले 27 वर्षों से चल रही है। मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार यह पूजा प्रकृति, जीव-जंतुओं और भगवान शिव के प्रति सम्मान को दर्शाती है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, बहुत समय पहले यहाँ के एक किसान लाला ने अपनी जीभ काटकर शिवलिंग पर चढ़ा दी थी। उसके बाद से यह परंपरा शुरू हुई। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष हरिपाल यादव बताते हैं कि इस घटना से यह सिद्ध होता है कि शिवलिंग स्वयंभू है और सांप, बिच्छू और अन्य जीव-जंतु भगवान भोलेनाथ से जुड़े होने के कारण पूजा में शामिल होते हैं।

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अद्भुत शिवलिंग: दिन में तीन बार बदलता रंग

इस मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है और दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। मंदिर समिति के सदस्य नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार

सुबह: ब्राउन रंग

दोपहर: चमकदार और तेजस्वी रंग

सूर्यास्त: हल्की आभा

भक्त इसे दिव्य शक्ति का प्रमाण मानते हैं और दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं।

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भक्तों के लिए आकर्षण

हर साल महाशिवरात्रि के तीसरे दिन यहाँ श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आश्चर्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जीवित सांपों से शिवलिंग का श्रृंगार और स्वयंभू शिवलिंग का रंग बदलना, दोनों ही घटनाएँ भक्तों की आस्था को और मजबूत करती हैं।

नोट: यह जानकारी मंदिर की परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे अपनाने या किसी कार्रवाई के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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