इस अगस्त को रखा जाएगा कजरी तीज व्रत, यहां नोट कर लें पूजा का सही समय

punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 01:39 PM (IST)

नारी डेस्क : कजरी तीज सुहागिन महिलाओं के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस साल कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा। व्रत के दौरान महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं और कई जगहों पर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। अगर आप भी इस दिन व्रत रखने वाली हैं, तो पूजा से पहले सामग्री की पूरी लिस्ट तैयार कर लें।

कजरी तीज पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

कजरी तीज की पूजा के लिए आप ये सामग्री पहले से तैयार करके रख सकती हैं
भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति
पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
कलश, केले के पत्ते दुर्वा और बेलपत्र
कच्चा सूत या मौली
रुई की बत्ती, घी और दीपक 
अगरबत्ती, धूप और कपूर
पूजा और आरती की थाली
नारियल और सुपारी
गंगाजल, अक्षत (चावल)
चंदन, रोली, कुमकुम और अबीर-गुलाल
दूध, दही, शहद, घी और मिश्री से बना पंचामृत
मौसमी फल, मिठाई
भोग के लिए खीर या अन्य सात्विक पकवान।

PunjabKesari

माता पार्वती के लिए रखें श्रृंगार का सामान

पूजा में माता पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने की भी परंपरा कई जगहों पर मानी जाती है। इसके लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, महावर, कुमकुम, कंघी, बिछिया, आईना, इत्र, चुनरी और साड़ी जैसी चीजें रखी जा सकती हैं।

यें भी पढ़ें : सोने की कलम से लिखी होती है इस मूलांक वालों की किस्मत, धन-वैभव खुद आता है इनके पास

कजरी तीज पर करें इन मंत्रों का जाप

पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप किया जा सकता है
ॐ नमः शिवाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ उमा महेश्वराय नमः।
ॐ गौरीशंकराय नमः।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौरी देव्यै नमः।

PunjabKesari

इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी भगवान शिव की आराधना में किया जाता है
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

कजरी तीज का क्या है महत्व?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में कजरी तीज को सुहाग और दांपत्य सुख से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। मान्यता है कि विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है।

यें भी पढ़ें : सिर्फ 1-2 दिन में ही Periods हो जाते खत्म तो Expert ने बताया इसे सबसे खराब

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोलें व्रत

कई क्षेत्रों में कजरी तीज पर रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। हालांकि, व्रत और पूजा की विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा का समय और विधि जरूर देख लें।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

static