अब डेंगू से बचाव होगा आसान! भारत में जापानी QDENGA वैक्सीन को मिली मंजूरी

punjabkesari.in Monday, Jul 20, 2026 - 04:35 PM (IST)

नारी डेस्क : हर साल मानसून के साथ डेंगू का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। देशभर में लाखों लोग इस मच्छरजनित बीमारी की चपेट में आते हैं और कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होती है। ऐसे में डेंगू से बचाव को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने जापानी फार्मास्युटिकल कंपनी Takeda द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी दे दी है। इसके बाद भारत में इस वैक्सीन के उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है QDENGA वैक्सीन?

QDENGA एक टेट्रावैलेंट लाइव एटेन्यूएटेड डेंगू वैक्सीन है, जिसे जापानी कंपनी Takeda Pharmaceutical ने विकसित किया है। यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य डेंगू संक्रमण और गंभीर डेंगू के खतरे को कम करना है।

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कौन लगवा सकता है यह वैक्सीन?

कंपनी के मुताबिक, QDENGA वैक्सीन उन लोगों के लिए भी उपयुक्त है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन लोगों के लिए भी जिन्हें कभी डेंगू का संक्रमण नहीं हुआ। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वैक्सीन लगवाने से पहले डेंगू एंटीबॉडी या संक्रमण की जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी बिना किसी प्री-स्क्रीनिंग टेस्ट के भी पात्र व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के अनुसार यह वैक्सीन लगवा सकते हैं।

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भारत में क्यों है इसकी जरूरत?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर साल डेंगू के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं। कंपनी के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारत में डेंगू के मामलों में करीब 11 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है, जिससे अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बता दें की Takeda ने वर्ष 2024 में भारतीय वैक्सीन निर्माता Biological E के साथ साझेदारी की थी। इस समझौते के तहत Biological E भारत में हर साल 5 करोड़ डोज तक उत्पादन करने की क्षमता विकसित करेगी। कंपनी का लक्ष्य दशक के अंत तक वैश्विक स्तर पर 10 करोड़ डोज प्रतिवर्ष उपलब्ध कराना है।

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43 देशों में मिल चुकी है मंजूरी

Takeda के अनुसार, 2022 में पहली बार लॉन्च होने के बाद QDENGA को दुनिया के 43 देशों में नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है। अब तक इसकी 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं। कंपनी का दावा है कि दीर्घकालिक अध्ययनों में इस वैक्सीन ने डेंगू संक्रमण और डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में प्रभावी सुरक्षा दिखाई है।

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क्या वैक्सीन लगने के बाद भी सावधानी जरूरी है?

विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना भी जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का उपयोग करें। इससे संक्रमण का खतरा और भी कम किया जा सकता है। डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच QDENGA को मिली मंजूरी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, वैक्सीन की उपलब्धता, कीमत और टीकाकरण से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा जारी किए जाएंगे।

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ध्यान दें: यह वैक्सीन डेंगू से बचाव (Prevention) के लिए है। यह दावा करना सही नहीं होगा कि इसे लगवाने के बाद "डेंगू कभी नहीं होगा" या "परमानेंट मुक्ति" मिल जाएगी। किसी भी वैक्सीन की तरह इसका उद्देश्य संक्रमण और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करना है।


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Monika

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