बिना कोशिश तेजी से वजन घट रहा है तो सावधान! हो सकता है Hyperthyroidism
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 12:39 PM (IST)
नारी डेस्क : अचानक बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन कम होना हमेशा अच्छी बात नहीं होती। अगर इसके साथ दिल की धड़कन तेज होना, हाथ कांपना, ज्यादा पसीना आना या नींद में परेशानी जैसे लक्षण भी नजर आ रहे हैं, तो यह हाइपरथायरॉइडिज्म यानी ओवरएक्टिव थायराइड का संकेत हो सकता है। थायराइड हमारे शरीर की एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है, जो गर्दन के सामने स्थित होती है। यह मुख्य रूप से थायरॉक्सिन (T4) और ट्रायोडोथायरोनिन (T3) हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल, हृदय गति और शरीर के कई दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो इस स्थिति को हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) कहा जाता है। इसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म सामान्य से तेज हो सकता है, जिसके कारण कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
हाइपरथायरॉइडिज्म के 10 प्रमुख लक्षण
हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जबकि कुछ में अचानक नजर आ सकते हैं।

बिना कोशिश तेजी से वजन कम होना
हाइपरथायरॉइडिज्म का एक प्रमुख संकेत बिना डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन कम होना है। मेटाबॉलिज्म तेज होने के कारण शरीर सामान्य से ज्यादा कैलोरी खर्च कर सकता है। कई बार भूख बढ़ने के बावजूद वजन कम होता रहता है।
हाथों में कंपकंपी
हाथों में हल्का या लगातार कंपन महसूस होना भी ओवरएक्टिव थायराइड का लक्षण हो सकता है। खासतौर पर हाथों को स्थिर रखने पर यह कंपकंपी ज्यादा महसूस हो सकती है।
दिल की धड़कन तेज होना
हाइपरथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से तेज या अनियमित हो सकती है। कुछ लोगों को पलपिटेशन यानी दिल जोर-जोर से धड़कने जैसा महसूस होता है।
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ज्यादा पसीना आना और गर्मी सहन न होना
थायराइड हार्मोन बढ़ने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है। इसके कारण सामान्य से ज्यादा गर्मी लगना और अधिक पसीना आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
नींद में परेशानी
ओवरएक्टिव थायराइड के कारण बेचैनी और बढ़ी हुई सक्रियता महसूस हो सकती है। इसकी वजह से नींद आने में परेशानी, बार-बार नींद खुलना या पर्याप्त नींद न लेने के बावजूद थकान महसूस होना संभव है।

चिड़चिड़ापन और बेचैनी
हाइपरथायरॉइडिज्म का असर मूड पर भी पड़ सकता है। व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, घबराहट, बेचैनी या चिंता अधिक महसूस हो सकती है और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।
बाल और त्वचा में बदलाव
इस स्थिति में बाल पतले होना या अधिक झड़ना देखा जा सकता है। त्वचा सामान्य से ज्यादा गर्म और नम महसूस हो सकती है।
बार-बार मल त्याग या दस्त
मेटाबॉलिज्म बढ़ने का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों को बार-बार मल त्याग, दस्त या पेट से जुड़ी दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।
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महिलाओं में पीरियड्स में बदलाव
महिलाओं में हाइपरथायरॉइडिज्म की वजह से पीरियड्स सामान्य से हल्के हो सकते हैं या उनके बीच का अंतर बदल सकता है। कुछ मामलों में पीरियड्स मिस भी हो सकते हैं।
गले या आंखों में बदलाव
कुछ लोगों में थायराइड ग्रंथि बढ़ने के कारण गर्दन के सामने सूजन या गले में उभार (Goiter) दिखाई दे सकता है। खासतौर पर ग्रेव्स डिजीज में आंखों में उभार, सूजन, लालिमा या आंखों में असहजता जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

हाइपरथायरॉइडिज्म क्यों होता है?
ग्रेव्स डिजीज: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है और हाइपरथायरॉइडिज्म का सबसे आम कारण मानी जाती है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड को जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है।
थायराइड में गांठें: थायराइड में मौजूद कुछ गांठें जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लग सकती हैं। ऐसी स्थिति को टॉक्सिक नोड्यूल या टॉक्सिक मल्टीनोड्यूलर गोइटर कहा जा सकता है।
थायरॉइडिटिस: थायराइड ग्रंथि में सूजन होने पर जमा हुए थायराइड हार्मोन रक्त में अधिक मात्रा में रिलीज हो सकते हैं। यह स्थिति कई बार अस्थायी होती है और बाद में थायराइड कम सक्रिय भी हो सकता है।
शरीर में आयोडीन की अधिकता: कुछ परिस्थितियों में बहुत ज्यादा आयोडीन का सेवन भी थायराइड हार्मोन के बढ़ने का कारण बन सकता है। हालांकि आयोडीन की जरूरत व्यक्ति की स्थिति और आहार पर निर्भर करती है, इसलिए सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।
इलाज न कराने पर क्या हो सकता है?
हाइपरथायरॉइडिज्म को लंबे समय तक बिना इलाज के छोड़ने पर शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है। इससे दिल की धड़कन अनियमित होना, एट्रियल फिब्रिलेशन, हृदय संबंधी समस्याएं और हड्डियों का कमजोर होना जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। गंभीर और दुर्लभ मामलों में थायरॉइड स्टॉर्म (Thyroid Storm) हो सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें बहुत तेज धड़कन, तेज बुखार, अत्यधिक बेचैनी या भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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हाइपरथायरॉइडिज्म की जांच कैसे होती है?
अगर डॉक्टर को लक्षणों के आधार पर हाइपरथायरॉइडिज्म का संदेह होता है, तो वह आमतौर पर थायराइड फंक्शन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
TSH, T3 और T4 टेस्ट: रक्त जांच में TSH, Free T4 और जरूरत के अनुसार T3 के स्तर की जांच की जाती है। हाइपरथायरॉइडिज्म में आमतौर पर TSH कम और T4 या T3 बढ़ा हुआ पाया जा सकता है, हालांकि टेस्ट के परिणाम बीमारी के कारण और स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं।
थायराइड एंटीबॉडी टेस्ट: अगर ग्रेव्स डिजीज का संदेह हो, तो डॉक्टर कुछ एंटीबॉडी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इससे बीमारी के कारण का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
अल्ट्रासाउंड या थायराइड स्कैन: थायराइड में गांठ या ग्रंथि की संरचना देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर रेडियोएक्टिव आयोडीन अपटेक टेस्ट या थायराइड स्कैन की सलाह भी दे सकते हैं।

हाइपरथायरॉइडिज्म का इलाज कैसे होता है?
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि हाइपरथायरॉइडिज्म का कारण क्या है, लक्षण कितने गंभीर हैं और व्यक्ति की उम्र व स्वास्थ्य की स्थिति कैसी है।
एंटी-थायराइड दवाएं: कुछ मरीजों को थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम करने के लिए मेथिमाजोल जैसी दवाएं दी जाती हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रोपाइलथायोयूरासिल (PTU) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में लेना चाहिए।
बीटा-ब्लॉकर्स: तेज धड़कन, हाथ कांपना और बेचैनी जैसे लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर कुछ मरीजों को बीटा-ब्लॉकर दे सकते हैं। ये दवाएं थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम नहीं करतीं, बल्कि मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी: कुछ मामलों में रेडियोएक्टिव आयोडीन से थायराइड की अत्यधिक सक्रियता को कम किया जाता है। इसके बाद कुछ लोगों में थायराइड कम सक्रिय हो सकता है, जिसके लिए लंबे समय तक थायराइड हार्मोन की दवा की जरूरत पड़ सकती है।
सर्जरी: अगर थायराइड बहुत ज्यादा बढ़ गया हो, बड़ी गांठ हो या कुछ अन्य विशेष परिस्थितियां हों, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर आपका वजन बिना किसी स्पष्ट वजह के तेजी से कम हो रहा है और इसके साथ दिल की धड़कन तेज होना, हाथ कांपना, ज्यादा पसीना आना, नींद में परेशानी या बेचैनी जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर थायराइड की जांच कराई जा सकती है।

