बरसाती मौसम में Vagina में Infection के ये लक्षण इग्नोर ना करें, बढ़ जाएगी समस्या

punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 04:41 PM (IST)

नारी डेस्कः बारिश के मौसम में नमी और पसीना बहुत आता है जिसके चलते कई तरह के वायरल इंफेक्शन व फ्लू फैलने का खतरा बना रहता है। इस दौरान महिलाओं को प्राइवेट पार्ट खासकर वेजाइना से जुड़ी इंफेक्शन भी बहुत जल्दी होती है। प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन और यूटीआई संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। सही हाइजीन और कुछ आसान आदतें अपनाकर इन परेशानियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाती है प्राइवेट पार्ट की परेशानी?

मानसून के दौरान वातावरण में नमी अधिक होती है। पसीना, गीले कपड़े और लंबे समय तक नमी बने रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में वैजाइना और बाहरी प्राइवेट एरिया में खुजली, जलन, लालपन और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ध्यान रखें कि वैजाइना अपने आप को साफ रखने की क्षमता रखती है। इसलिए अंदरूनी हिस्से को बार-बार या कठोर साबुन से धोने की जरूरत नहीं होती। जरूरत से ज्यादा सफाई भी प्राकृतिक बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकती है।

मानसून में वैजाइनल इंफेक्शन के मुख्य कारण

लंबे समय तक गीले या पसीने वाले कपड़े पहनना।
बहुत टाइट जींस या सिंथेटिक अंडरगारमेंट्स पहनना।
प्राइवेट पार्ट को ठीक से सूखा न रखना।
गंदे या देर तक इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड।
बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन (डॉक्टर की सलाह के बिना)।
डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी।
सुगंधित इंटिमेट वॉश, स्प्रे या परफ्यूम का अधिक इस्तेमाल।
PunjabKesari

वैजाइना से जुड़ी ये लक्षण दिखें तो नजरअंदाज ना करें

लगातार खुजली
जलन या चुभन
लालपन या सूजन
पेशाब करते समय जलन
सफेद, पीला या हरा असामान्य डिस्चार्ज
दुर्गंध
संबंध बनाते समय दर्द
दाने या रैशेज
यदि तेज दर्द, बुखार, खून आना या बार-बार संक्रमण हो रहा है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।
PunjabKesari

मानसून में प्राइवेट पार्ट की देखभाल कैसे करें?

1. हमेशा सूखा रखेंः नहाने या पेशाब के बाद प्राइवेट एरिया को मुलायम तौलिए से अच्छी तरह सुखाएं।

2. कॉटन अंडरगारमेंट पहनेंः सूती कपड़े हवा का प्रवाह बनाए रखते हैं और नमी कम करते हैं।

3. गीले कपड़े तुरंत बदलेंः बारिश में भीगने या ज्यादा पसीना आने पर जल्द से जल्द कपड़े बदल लें।

4. बहुत टाइट कपड़े न पहनेंः ढीले और आरामदायक कपड़े नमी कम बनाए रखते हैं।

5. सैनिटरी पैड समय पर बदलेंः पीरियड्स के दौरान हर 4–6 घंटे में, या जरूरत के अनुसार, पैड बदलें।

6. आगे से पीछे की ओर सफाई करेंः टॉयलेट के बाद हमेशा फ्रंट-टू-बैक साफ करें, ताकि बैक्टीरिया वैजाइना तक न पहुंचें।

7. पर्याप्त पानी पिएंः शरीर में पानी की कमी न होने दें।
 

देसी इलाज का करें उपाय

ये उपाय सामान्य देखभाल के लिए हैं, इलाज का विकल्प नहीं।

दही: यदि आपको दूध से एलर्जी नहीं है, तो भोजन में दही शामिल करें। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को समर्थन दे सकते हैं।
लहसुन और हल्दी: संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करें। इनमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं।
आंवला, मौसमी फल और हरी सब्जियां: इम्यूनिटी को बेहतर रखने में मदद करते हैं।
साफ और सूखे अंडरगारमेंट्स: रोज बदलें और धूप में अच्छी तरह सुखाकर पहनें।
लेकिन इस बात भी ध्यान रखें कि दही, हल्दी, नींबू, बेकिंग सोडा, लहसुन, नारियल तेल या कोई भी घरेलू चीज सीधे वैजाइना या प्राइवेट पार्ट के अंदर न लगाएं। इससे जलन बढ़ सकती है और संक्रमण गंभीर हो सकता है।

इन गलतियों से बचें

सुगंधित साबुन या इंटिमेट स्प्रे का अधिक इस्तेमाल।
बार-बार वैजाइनल डूशिंग (अंदर से धोना)।
गीले स्विमवियर या भीगे कपड़ों में लंबे समय तक रहना।
खुजली होने पर बार-बार खरोंचना।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीफंगल या एंटीबायोटिक क्रीम लगाना।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

खुजली 2–3 दिन से ज्यादा रहे।
दुर्गंध वाला या हरे/पीले रंग का डिस्चार्ज आए।
तेज दर्द या सूजन हो।
बुखार के साथ संक्रमण हो।
बार-बार यही समस्या हो रही हो।
गर्भावस्था के दौरान ऐसे लक्षण दिखाई दें।

याद रखने वाली बातें 

मानसून में थोड़ी-सी सावधानी जैसे प्राइवेट पार्ट को सूखा रखना, कॉटन अंडरगारमेंट पहनना, गीले कपड़े तुरंत बदलना और सही हाइजीन बनाए रखना-खुजली और संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। यदि लक्षण बने रहें या बढ़ जाएं, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Vandana

Related News

static