उम्र के हिसाब से बॉडी में कितना Protein होना चाहिए ?
punjabkesari.in Sunday, Oct 11, 2026 - 11:57 AM (IST)
नारी डेस्क: प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। अक्सर लोग मानते हैं कि प्रोटीन का काम सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत बनाना है, लेकिन ऐसा नहीं है। शरीर की ग्रोथ से लेकर खराब टिश्यू की मरम्मत, हड्डियों को सहारा देने, त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने और कई जरूरी हार्मोन व एंजाइम बनाने तक में प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि रोजाना की डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करना जरूरी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों, किशोरों, युवाओं और बुजुर्गों को एक जैसी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत नहीं होती? उम्र के साथ शरीर में होने वाले बदलाव, वजन और शारीरिक गतिविधियों के आधार पर इसकी जरूरत बदल सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपकी उम्र के हिसाब से रोजाना कितना प्रोटीन लेना सही रहेगा।
स्वस्थ वयस्क को रोज कितना प्रोटीन चाहिए
एक सामान्य स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना प्रोटीन की जरूरत उसके शरीर के वजन के हिसाब से तय की जा सकती है। आमतौर पर स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रति किलोग्राम वजन पर करीब 0.8 ग्राम प्रोटीन का मानक इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का वजन 60 किलो है, तो उसे रोजाना लगभग 48 ग्राम प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। वहीं, 70 किलो वजन वाले व्यक्ति के लिए यह मात्रा करीब 56 ग्राम होगी। हालांकि, यह मात्रा हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। जो लोग नियमित रूप से जिम जाते हैं, खेलते हैं या भारी शारीरिक मेहनत करते हैं, उनकी जरूरत ज्यादा हो सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अतिरिक्त प्रोटीन की जरूरत पड़ सकती है। किसी बीमारी से उबर रहे व्यक्ति की जरूरत भी अलग हो सकती है।

बच्चों को कितने प्रोटीन की जरूरत होती है
बचपन में शरीर का विकास तेजी से होता है। इस दौरान हड्डियां, मांसपेशियां और शरीर के दूसरे टिश्यू विकसित होते हैं। इसलिए बच्चों की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन होना जरूरी है।
उम्र के हिसाब से बच्चों के लिए रोजाना प्रोटीन की सामान्य जरूरत इस प्रकार है
1 से 3 साल के बच्चे: करीब 13 ग्राम प्रोटीन।
4 से 8 साल के बच्चे: करीब 19 ग्राम प्रोटीन।
9 से 13 साल के बच्चे: लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए करीब 34 ग्राम प्रोटीन।
बच्चों को प्रोटीन देने के लिए महंगे सप्लीमेंट खरीदना जरूरी नहीं है। घर में आसानी से मिलने वाली दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया और अच्छी तरह पिसे या उम्र के अनुसार सुरक्षित तरीके से दिए गए नट्स इसके अच्छे स्रोत हैं। छोटे बच्चों के लिए भोजन की मात्रा और बनावट उनकी उम्र के अनुसार रखना चाहिए।
किशोरावस्था में बढ़ जाती है प्रोटीन की जरूरत
किशोरावस्था में शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस उम्र में लंबाई बढ़ती है, मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर में नई कोशिकाएं बनती हैं। ऐसे में पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी हो जाता है। सामान्य पोषण संबंधी मानकों के अनुसार, 14 से 18 साल के किशोरों को रोजाना प्रोटीन की जरूरत इस प्रकार हो सकती है:

लड़के: करीब 52 ग्राम।
लड़कियां: करीब 46 ग्राम।
जो किशोर नियमित रूप से खेलते हैं या ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करते हैं, उनकी जरूरत अलग हो सकती है। इस उम्र में केवल प्रोटीन पर ध्यान देने के बजाय संतुलित आहार लेना भी जरूरी है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल्स भी पर्याप्त मात्रा में मिलें।
बढ़ती उम्र में भी क्यों जरूरी है प्रोटीन?
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियों का द्रव्यमान कम होने का खतरा बढ़ जाता है। इसका असर चलने-फिरने, संतुलन बनाए रखने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। ऐसे में बुजुर्गों के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना खास तौर पर महत्वपूर्ण है। सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए इस्तेमाल होने वाला 0.8 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन का मानक एक शुरुआती आधार हो सकता है, लेकिन कई विशेषज्ञ बुजुर्गों के लिए उनकी सेहत और जरूरत के अनुसार इससे अधिक मात्रा पर भी विचार करते हैं।
बुजुर्ग अपनी डाइट में दाल, चना, राजमा, सोया, दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली और चिकन जैसे विकल्प शामिल कर सकते हैं। अगर चबाने या पचाने में परेशानी होती है, तो नरम और आसानी से खाए जाने वाले प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ चुनना मददगार हो सकता है।
हालांकि, किडनी की बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बुजुर्गों को प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से तय करनी चाहिए।
प्रोटीन के अच्छे स्रोत कौन-कौन से हैं?
प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए केवल प्रोटीन पाउडर या सप्लीमेंट पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। रोजमर्रा के खाने में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनसे शरीर को प्रोटीन मिल सकता है।

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प्रोटीन के प्रमुख स्रोत:
दालें और फलियां: मूंग, मसूर, अरहर, चना और राजमा।
दूध से बने खाद्य पदार्थ: दूध, दही और पनीर।
सोया उत्पाद: सोयाबीन, टोफू और सोया चंक्स।
अंडे: अंडे की सफेदी और जर्दी, दोनों में प्रोटीन होता है।
मांसाहारी विकल्प: मछली और चिकन।
नट्स और बीज: बादाम, मूंगफली, कद्दू के बीज और दूसरे बीज।
शाकाहारी लोग दालों, फलियों, दूध से बने खाद्य पदार्थों और सोया को अपनी डाइट में शामिल करके प्रोटीन की जरूरत पूरी करने की कोशिश कर सकते हैं। अलग-अलग खाद्य पदार्थों को संतुलित मात्रा में खाना भी जरूरी है।
क्या ज्यादा प्रोटीन लेना भी नुकसानदायक हो सकता है?
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जितना ज्यादा प्रोटीन लिया जाए, उतना ही अच्छा होगा। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से डाइट में दूसरे जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल बिना जरूरत या सलाह के नहीं करना चाहिए।
जिन लोगों को किडनी की बीमारी है या जिन्हें किसी खास बीमारी के कारण डाइट में बदलाव करने की सलाह दी गई है, उन्हें प्रोटीन की मात्रा खुद से नहीं बढ़ानी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए सही मात्रा उनकी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर तय की जाती है।
प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
दिनभर के खाने में प्रोटीन के स्रोत शामिल करें।
केवल एक ही खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोत चुनें।
बच्चों और किशोरों को उनकी उम्र और विकास के अनुसार संतुलित आहार दें।

नियमित एक्सरसाइज करने वाले लोग अपनी गतिविधि और लक्ष्य के हिसाब से जरूरत तय करें।
प्रोटीन पाउडर या सप्लीमेंट लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें, खासकर अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है।
ध्यान रखें: प्रोटीन की जरूरत का सही अंदाजा लगाने के लिए उम्र के साथ वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति को भी देखना जरूरी है। ऊपर बताई गई मात्राएं सामान्य पोषण संबंधी मानक हैं, हर व्यक्ति के लिए तय व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं।

