इस राज्य में बढ़ा HIV संक्रमण का खतरा, 66 हजार से ज्यादा चपेट में युवा आए
punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 03:18 PM (IST)
नारी डेस्क : कई बार जिंदगी में ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है, जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं होता। जब किसी गंभीर बीमारी या संक्रमण का पता चलता है, तो डर के साथ-साथ मन में यह चिंता भी आने लगती है कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे। इसी डर और झिझक की वजह से कई लोग समय पर जांच और इलाज से दूर हो जाते हैं। ऐसा ही एक संक्रमण है ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV), जिसे लेकर आज भी समाज में कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। हाल ही में कर्नाटक में HIV संक्रमण के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में युवा इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, जिसमें हजारों छात्र भी शामिल हैं। स्थिति को देखते हुए सरकार ने कॉलेजों में जागरूकता, HIV टेस्टिंग और काउंसलिंग अभियान शुरू करने का फैसला लिया है, ताकि युवाओं को सही जानकारी मिल सके और समय पर बचाव व इलाज किया जा सके।
क्या है HIV और कैसे बन सकता है AIDS?
HIV यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर करता है। अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो यह संक्रमण एडवांस स्टेज में पहुंचकर AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) का रूप ले सकता है। हालांकि, आज के समय में सही इलाज और नियमित दवाओं की मदद से HIV संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है।

कर्नाटक में युवाओं में बढ़ रहे HIV के मामले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक में करीब 2.60 लाख लोग HIV से संक्रमित हैं। इनमें से कई लोगों को अपने संक्रमण की जानकारी नहीं है। सबसे ज्यादा चिंता 18 से 35 साल के युवाओं में बढ़ते मामलों को लेकर है। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 के दौरान जहां लगभग 44,500 युवा HIV संक्रमित बताए गए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 66,600 तक पहुंच गई। इनमें 18 से 25 साल की उम्र के लगभग 7 हजार स्टूडेंट्स भी शामिल बताए जा रहे हैं।
यें भी पढ़ें : गुणों से भरपूर मखाना इन 5 लोगों को नहीं खाना चाहिए
सरकार ने कॉलेजों में शुरू किया जागरूकता अभियान
बढ़ते मामलों को देखते हुए कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन सोसायटी ने कॉलेजों में HIV टेस्टिंग और काउंसलिंग कैंप लगाने की योजना बनाई है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी छात्र की इच्छा के बिना HIV टेस्ट नहीं किया जाएगा। छात्रों को संक्रमण, बचाव और इलाज के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके।

HIV को रोकने के लिए जरूरी हैं ये 3 कदम
खुद को संक्रमण से बचाएं
सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं।
जोखिम वाली स्थिति में डॉक्टर की सलाह से PrEP (Pre-Exposure Prophylaxis) लिया जा सकता है।
इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज शेयर करने से बचें।
संभावित संपर्क के बाद 72 घंटे के अंदर PEP (Post-Exposure Prophylaxis) लेने की सलाह दी जाती है।
यें भी पढ़ें : कंधे का दर्द नहीं है मामूली! 2 हफ्तों से ज्यादा रहे तो तुरंत कराएं जांच
संक्रमण होने पर इलाज शुरू करें: अगर किसी व्यक्ति में HIV की पुष्टि होती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ART (Antiretroviral Therapy) दवाएं लेना जरूरी है। इससे वायरस को नियंत्रित करने और संक्रमण फैलने के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
मां से बच्चे में संक्रमण रोकना: HIV संक्रमित गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज और दवाएं लेनी चाहिए, ताकि बच्चे में संक्रमण पहुंचने के खतरे को कम किया जा सके।

डॉक्टर ने बताया HIV से जुड़ा बड़ा मिथक
बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा सिंह के अनुसार, HIV संक्रमण कई बार शुरुआती चरण में बिना लक्षणों के भी हो सकता है। इसलिए जोखिम होने पर समय पर टेस्टिंग जरूरी है। उन्होंने बताया कि HIV को लेकर लोगों में कई गलत धारणाएं हैं। यह संक्रमण गले मिलने, हाथ मिलाने, साथ खाना खाने या मच्छर के काटने से नहीं फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, HIV को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता, समय पर जांच और सही इलाज कराएं। लोगों को संक्रमण से जुड़े सही तथ्यों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि डर और गलत धारणाओं को दूर किया जा सके।
नोट: अगर किसी व्यक्ति को HIV संक्रमण का खतरा महसूस होता है या कोई संदेह है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह और जांच करवानी चाहिए।

