सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये 6 काम
punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 05:24 PM (IST)
नारी डेस्क: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में दर्शन करने से पहले कुछ नियमों और सुविधाओं के बारे में जानकारी होना जरूरी है। 8 जनवरी 2026 से सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व चल रहा है। इस समय या अन्य दिनों में मंदिर जाने वाले भक्तों को धार्मिक नियमों और मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
सोमनाथ मंदिर का महत्व
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला है। इसे चंद्र देव ने स्थापित किया था। चंद्रमा को ‘सोम’ कहा जाता है और सोमनाथ का मतलब है “चंद्रमा के नाथ”। कहा जाता है कि चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की स्तुति करनी पड़ी थी। शिव पुराण में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है और सोमनाथ पहला स्थान रखता है। इसे स्मरण करने से व्यक्ति के पाप सात जन्मों तक नष्ट होते हैं।

सोमनाथ मंदिर में दर्शन के नियम और ध्यान रखने योग्य बातें
ड्रेस कोड: मंदिर में प्रवेश करते समय श्रद्धालु साधारण, साफ़-सुथरे कपड़े पहनें। बहुत अलंकृत या अशोभनीय कपड़े पहनकर प्रवेश वर्जित है।
सादगी बनाए रखें: मंदिर परिसर में शोर-शराबा न करें और मोबाइल फोन को साइलेंट मोड में रखें।
कैमरा और वीडियो: ज्यादातर धार्मिक समय और विशेष समारोहों में कैमरा या वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होती।
पूजा सामग्री: मंदिर में प्रार्थना सामग्री मंदिर प्रशासन से ही खरीदें, बाहर से लाने की अनुमति नहीं होती।
धार्मिक नियम: मंदिर में प्रवेश से पहले स्नान कर लेना और मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।
भक्तों के लिए सुविधाएं: मंदिर में पैदल रास्ता, पार्किंग, दर्शन टिकट काउंटर, भोजन और जलपान की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

दर्शन और आरती का समय
मंदिर सुबह 5:00 बजे से खुलता है और शाम 9:00 बजे तक दर्शन की सुविधा रहती है। दिन में सुबह और शाम को नियमित आरती होती है। विशेष अवसरों पर, जैसे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान, विशेष पूजा, ओंकार मंत्र जाप और शौर्य यात्रा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन इस प्रकार किया गया है
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्॥
परल्यां वैघनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति॥
इस स्तुति का जाप करने से भक्तों के पाप दूर होते हैं और उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।

अगर आप सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं तो ड्रेस कोड, दर्शन नियम और मंदिर सुविधाओं का पालन जरूर करें। विशेष पर्व और त्यौहार के समय मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए समय का ध्यान रखें और संयम से दर्शन करें।

