Skin Problem: सोरायसिस को ना करें नजरअंदाज, इन टिप्स से रखें बचाव

punjabkesari.in Wednesday, Jan 22, 2020 - 10:16 AM (IST)

सोरायसिस क्रॉनिक एक ऐसा स्किन डिसीज है, जो सिर के बालों के पीछे, हाथ पैर, हथलियों या पीठ पर होता है। यह समस्या जल्दी ठीक नहीं होती वहीं सर्दी में यह समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में मरीज को ना सिर्फ स्किन बल्कि खान-पान में भी सावधानी बरतनें की जरूरत होती है।

कैसे होता है सोरायसिस?

जिस तरह हमारे नाखून और बाल बढ़ते हैं, ठीक वैसे ही त्वचा भी बदलती है। आमतौर पर नई त्वचा महीनेभर में बदलती है लेकिन सोरायसिस प्रभावित हिस्से में त्वचा 3-4 दिन में ही तेजी से बदलती है और उभरी हुई महसूस होती है। सोरायसिस के दौरान त्वचा इतनी कमजोर और हल्की पड़ जाती है कि वो बनने से पहले ही खराब होने लगती है। इससे प्रभावित स्किन पर लाल चकते और रक्त की बूंदें दिखाई देने लगती है।

किन लोगों को अधिक होती है समस्या

यह समस्या 100 में से केवल 2% लोगों को ही होती है, जिसका ज्यादातर कारण आनुवांशिक या जीन्स में प्रॉब्लम ही होता है। इसके अलावा कमजोर इम्यून सिस्टम, हार्मोन परिवर्तन, ब्रोंकाइटिस, इंफेक्शन, नशीलीं चीजों का सेवन भी इसका कारण बन सकते हैं।

. यही नहीं, तनाव भी इसका कारण बन सकता है। वहीं अगर आप पहले से ही इसके मरीज है तो यह आपके लिए और भी खतरनाक है।
. शरीर में पोषक तत्वों की कमी या घी-तेल का बिल्कुल सेवन न करना क्योंकि इससे स्किन को मॉइश्चराइज नहीं मिल पाता।
. बहुत ज्यादा तेज धूप में बाहर रहने वाले स्किन की केयर ना करना वाले लोगों को भी यह समस्या हो सकती है।

सोरायसिस के लक्षण

. छिल्केदार त्वचा उतरना
. स्किन पर लाल-लाल पपड़ियां जमना।
. कोहनी, घुटनों, कमर पर ड्राईनेस से शुरुआत।
. सर्दियों में स्किन ज्यादा ड्राई होना।
. त्वचा में सूजन, खुजली, जलन और लालीपन

चलिए अब आपको बताते हैं कि सोरायसिस के मरीज को किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए...

क्या खाएं और क्या नहीं?

साबुत अनाज, फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, अदरक, अजवाइन, दालें, करेले का जूस, बीज, नट्स का अधिक सेवन करें। अल्कोहल, सिगरेट, डेयरी प्रॉडक्ट्स, जंक फूड, ट्रांस फैट फूड्स, रेड मीट, ग्लूटेन आहार और खट्टी चीजें ना खाएं।

गुनगुने पानी से स्नान

गुनगुने पानी में सेंधा नमक, मिनरल ऑयल, दूध व जैतून तेल मिक्स करके नहाने से लालीपन, जलन और खुजली कम होगी। नहाने के बाद व सोने से पहले माइश्चराइजर जरूर लगाएं। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें।

भरपूर पानी पीएं

दिनभर में कम से कम 8-9 गिलास जरूर पीएं। इससे स्किन में नमी बनी रहती है और वो हाइड्रेट रहती है।

जैतून तेल से मालिश

1 कप जैतून के तेल में कुछ बूदें कंदुला और आर्गेनिक ऑयल की मिक्स करके मसाज करने से भी फायदा होगा।

आयुर्वेदिक उपचार

. केले के पत्ते को पीसकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इससे ठंडक मिलेगी।
. तिल के बीजों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह इसे खाली पेट पीएं। इससे सोरायसिस में आराम मिलेगा।
. सुबह खाली पेट करेले का जूस पीएं। कड़वापन खत्म करने के लिए आप इसमें नींबू का रस भी मिला सकते हैं।

इसके साथ-साथ कुछ जरूरी बातों का भी रखें ध्यान...

. डॉक्टर से पूछे बिना किसी भी साबुन या क्रीम का यूज ना करें।
. सर्दी में अपने शरीर को अच्छी तरह से कवर करें।
. विटंर वूलन से इचिंग ना हो इसके लिए नीचे कॉटन के कपड़े पहनें।
. किसी की तौलिया साबुन इस्तेमाल ना करें और ना ही अपनी किसी को दें।
. सुबह 10-15 मिनट गुनगुनी धूप भी लें।
. तनाव या गले में इंफैक्शन होने पर तुरंत इलाज करें क्योंकि इससे सोरायसिस बढ़ता है।
. प्रभावित हिस्से पर खुजली न करें, इससे इंफैक्शन का खतरा रहता है।
. व्यायाम व योग जरूर करें।
. उल्टी, यूरिन आदि को ज्यादा देर न रोकें।

Content Writer

Anjali Rajput