तीन बेटियां पर आखिरी वक्त में कोई नहीं था इस बेबस पिता के पास , ऑनलाइन ही करवा दिया अंतिम संस्कार
punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 10:38 AM (IST)
नारी डेस्क: बच्चों के लिए मां- बाप अपना सब कुछ लगा कुर्बान कर देते हैं, इसके बदले वह सिर्फ उनका साथ मांगते हैं। एक जमाने में वृद्धाश्रम में वही लोग जाया करते थे जिनकी कोई औलाद नहीं होती थी उनकी कोई देखभाल करने वाला नहीं होता था, लेकिन अब तो वृद्धाश्रम उन लोगों से भरे हुए हैं जिन्होंने अपने जिंदगी में खूब नाम और दौलत कमाई लेकिन उनके बच्चे उन्हें अपने पास रखना नहीं चाहते। ऐसी ही एक कहानी सामने आई है 74 वर्षीय व्यवसायी शिवचरण रामरतन गुप्ता की जिन्होंने वृद्धाश्रम में बेटियों का इंतजार करते- करते दम तोड़ दिया।
What’s even the point of life if you can’t be there for your parents’ last rites ? video from Sonipat Imagine attending the funeral of the people who raised you stood by you your whole life through a video call. No one should ever have to go through this. pic.twitter.com/qrAqOYFWzT
— Nikhil saini (@iNikhilsaini) August 5, 2026
रामरतन गुप्ता पिछले तीन वर्षों से हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। उनकी पत्नी भी उसी वृद्धाश्रम में रहती थीं और लगभग दो साल पहले उनका वहीं निधन हो गया था। जब पिता के निधन की खबर मुंबई में रह रही उनकी बेटियों को दी गई तो उन्होंने अनुरोध किया कि उनका अंतिम संस्कार वहीं किया जाए और वे वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार में शामिल हुईं।
वृद्धाश्रम के प्रशासन के अनुसार, परिवार ने ₹5,100 ऑनलाइन ट्रांसफर किए और अनुरोध किया कि शव को मुंबई वापस लाने के बजाय सोनीपत में ही अंतिम संस्कार किया जाए। जब अंतिम संस्कार कौन करेगा, यह सवाल उठा, तो बेटियों ने कथित तौर पर गुज़ारिश की कि उन्हें वीडियो कॉल के ज़रिए अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाए। ओल्ड एज होम के डायरेक्टर आनंद कुमार ने बताया कि उन्होंने खुद इंतज़ामों की देखरेख की और वर्चुअल कनेक्शन की सुविधा दी।
उन्होंने याद करते हुए बताया कि जैसे ही वीडियो कॉल शुरू हुई और एक बेटी ने आखिरी बार अपने पिता का चेहरा देखा, तो रस्म आगे बढ़ने से पहले उसने धीरे से कहा, "पापा।" तीन बेटियों में से एक अंतिम संस्कार के दौरान लगातार संपर्क में रही और बार-बार प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगती रही। एक समय पर, उसने पूछा कि इस प्रक्रिया में और कितना समय लगेगा। जब उसे बताया गया कि अंतिम संस्कार शुरू हो चुका है और 10 से 15 मिनट में पूरा हो जाएगा, तो उसने कहा कि सब कुछ पूरा होने के बाद उसे इसका पूरा वीडियो भेजा जाए। मैनेजमेंट ने परिवार से यह भी कहा कि वे महीने की 20 तारीख से पहले गुप्ता जी की अस्थियां ले जाएं। इसके जवाब में, सबसे छोटी बेटी ने कहा कि वे देखेंगे कि उस तारीख से पहले आना मुमकिन होगा या नहीं।

