सरेंडर करो नहीं तो फिर... हनीमून में पति को मारने वाली सोनम को कोर्ट ने दी Warning
punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 07:13 PM (IST)
नारी डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या के मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी के आचरण पर मंगलवार को सवाल उठाए और सुझाव दिया कि वह आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करे। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि सोनम रघुवंशी कोर्ट में सरेंडर करे वरना बेल रद्द कर देंगे। मध्यप्रदेश के इंदौर की रहनेवाली सोनम रघुवंशी को उसके कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में पिछले वर्ष जून में गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट ने सोनम से पूछे ये सवाल
पुलिस का आरोप है कि सोनम ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से भाड़े के हमलावरों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ सोनम को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सोनम से सवाल किया- ''आप अपने आचरण पर क्या स्पष्टीकरण देंगी? पुलिस का मामला यह है कि आप अपने पति के साथ उस स्थान पर गई थीं। घटना वहीं हुई, जहां उन पर हमला हुआ और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद आपने क्या किया? यही मुख्य प्रश्न है। दूसरा, गिरफ्तारी के आधार को लेकर क्या आपने शुरुआती स्तर पर ही आपत्ति उठाई थी?'' उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह या तो मामले के गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित करेगा या फिर सोनम को आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का निर्देश देगा।
सोनम पर लगे ये आरोप
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवाह के तुरंत बाद दंपति हनीमून मनाने मेघालय गया था। सोनम ने अपने पति को बहला-फुसलाकर पहाड़ियों के एक सुनसान स्थान पर ले गई। उसके प्रेमी के जरिए भाड़े पर रखे गए तीन लोग भी उसका पीछा कर रहे थे। अंततः पति की हत्या कर दी गई पत्नी भी इसमें शामिल हुई और शव को खाई में फेंक दिया गया। उनकी मृत्यु खाई में फेंके जाने से नहीं हुई थी।'' जांच में उन तीन लोगों का भी पता चला, जिन्होंने सोनम की मदद की थी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब रिकॉर्ड पर यह भी है कि सोनम के प्रेमी ने उसे सलाह दी कि अब आत्मसमर्पण करना उसके लिए सुरक्षित रहेगा। उस समय वह गाजीपुर में थी और वहीं उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।''
सोनम के वकील ने दी ये दलील
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सोनम को अपनी गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी। सोनम की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस मामले को मीडिया ने अत्यधिक प्रचारित किया है और यह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामला है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों की विस्तार से जांच करने का इच्छुक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब बृहस्पतिवार को होगी। मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून को निचली अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत के आदेश को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग वाली राज्य सरकार की याचिका भी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने का तरीका 'न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव' को दर्शाता है।

