Alia Bhatt ने सद्गुरु से पूछा राहा की परवरिश का सवाल, जो हर माता-पिता के लिए...
punjabkesari.in Thursday, Sep 24, 2026 - 12:44 PM (IST)
नारी डेस्क : बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के मन में उसकी परवरिश को लेकर कई तरह के सवाल उठना आम बात है। बच्चा सही तरीके से बड़ा हो रहा है या नहीं, कहीं उनकी कोई गलती तो नहीं हो रही और उसके भविष्य के लिए कौन-सा फैसला बेहतर होगा, ऐसी चिंताएं अक्सर माता-पिता को परेशान करती हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी अपनी बेटी राहा की परवरिश को लेकर ऐसा ही सवाल आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु से पूछा। चेन्नई में हुई एक बातचीत के दौरान आलिया ने जानना चाहा कि माता-पिता कैसे समझें कि वे अपने बच्चे के लिए सही कर रहे हैं। सद्गुरु ने इस सवाल का जवाब देते हुए माता-पिता की चिंता और बच्चे की परवरिश के बीच संबंध पर बात की। उनका जवाब सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी भी सुनाई दी। बातचीत का यह हिस्सा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पेरेंटिंग, जिम्मेदारी और माता-पिता के भावनात्मक संतुलन को लेकर चर्चा होने लगी।
आलिया भट्ट ने सद्गुरु से क्या पूछा?
चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आलिया भट्ट ने पेरेंटिंग को लेकर सद्गुरु से सलाह मांगी। उनका सवाल उन माता-पिता की चिंता से जुड़ा था जो लगातार यह सोचते रहते हैं कि वे अपने बच्चे के लिए पर्याप्त अच्छा कर रहे हैं या नहीं। आलिया का यह सवाल कई माता-पिता की रोजमर्रा की चिंता से जुड़ा हुआ है। बच्चे की परवरिश में छोटी-छोटी बातों को लेकर भी माता-पिता के मन में सवाल आ सकते हैं। हालांकि आलिया एक अभिनेत्री और सार्वजनिक हस्ती हैं, लेकिन मां के तौर पर बच्चे के लिए सही फैसले लेने को लेकर उनके मन में भी ऐसी ही चिंताएं होना इस बातचीत का खास हिस्सा रहा।

राहा की परवरिश को लेकर सावधान रहती हैं आलिया
बेटी राहा के जन्म के बाद आलिया भट्ट कई मौकों पर मातृत्व से जुड़े अपने अनुभव साझा कर चुकी हैं। हालांकि वह अपनी बेटी की निजी जिंदगी और तस्वीरों को लेकर काफी सावधानी बरतती हैं। वह अक्सर इस बात पर जोर देती नजर आई हैं कि बच्चे की निजता और व्यक्तिगत स्पेस का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
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सद्गुरु ने पेरेंटिंग और चिंता को लेकर क्या कहा?
आलिया के सवाल के जवाब में सद्गुरु ने माता-पिता की चिंता को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक चिंतित माता-पिता अच्छे माता-पिता नहीं होते। यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी भी सुनाई दी। उनकी बात का संदर्भ उन माता-पिता की आदत से जुड़ा था जो बच्चे के भविष्य को लेकर लगातार चिंता करते रहते हैं। बच्चा ठीक से खाना खा रहा है या नहीं, उसकी पढ़ाई कैसी होगी, वह आगे क्या करेगा या कहीं माता-पिता से कोई गलती तो नहीं हो रही। ऐसे सवाल कई परिवारों में रोजमर्रा की चिंता का हिस्सा बन जाते हैं। हालांकि बच्चे की जरूरतों को लेकर सजग रहना जरूरी है, लेकिन हर समय तनाव और चिंता में रहना माता-पिता के लिए भी मुश्किल हो सकता है। इस बातचीत में यही अंतर समझने पर जोर दिखाई दिया कि जिम्मेदारी निभाना अलग बात है और हर समय चिंता में रहना अलग।

पेरेंटिंग में खुद का संतुलन भी जरूरी
बच्चे की देखभाल करते समय माता-पिता अक्सर अपनी भावनात्मक जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन पेरेंटिंग केवल बच्चे की पढ़ाई, खान-पान या भविष्य की चिंता करने तक सीमित नहीं है। माता-पिता का खुद भावनात्मक रूप से संतुलित रहना भी परिवार के माहौल को प्रभावित कर सकता है। सद्गुरु की बातचीत का एक अहम पहलू यही था कि माता-पिता को हर परिस्थिति में खुद को अनावश्यक तनाव में डालने से बचना चाहिए। बच्चे के लिए जिम्मेदार होना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर छोटी बात को लेकर खुद को परेशान किया जाए।

