पीरियड्स के दौरान होते है स्किन रैशेज तो ध्यान रखें ये 8 बातें

Sunday, March 11, 2018 10:47 AM
पीरियड्स के दौरान होते है स्किन रैशेज तो ध्यान रखें ये 8 बातें

पीरियड्स एक नेचुरल प्रोसेस है, जिससे हर स्त्री को माह में दो से सात दिन की अवधि तक गुजरना पड़ता है। पीरियड्स आने पर काफी बातों के साथ डाइट का भी ध्यान रखना होता है। इसके अलावा इस दौरान हाइजीन संबंधी जरा सी लापरवाही बरतने से महिलाओं को कई समस्या से भी गुजरना पड़ सकता है। अक्सर डॉक्टर्स हर 3 से 4 घंटे बाद पैड बदलने की सलाह देते है, ताकि इंफैक्शन से बचा जा सकें। वहीं अपनी वजाइनल स्किन के हिसाब से सैनिटरी पैड चुनना चाहिए। आज हम आपको इसकी के बारे में बताएंगे कि आपकी स्किन के लिए कौन-सा सैनिटरी पैड बेहतर रहेगा और पीरियड्स के दौरान किन बातों पर ज्यादा ध्यान ऱखना चाहिए, ताकि आप विभिन्न तरह समस्याएं होने से बच सकें।

 

1. सैनिटेशन के लिए चुनें सही तरीका
अपने पीरियडस् के हिसाब से सही सैनिटरी नैपकिन चुनें। ज्यादातर पीरियड्स के शुरूआती दिनों में तेज फ्लो होता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो लॉन्ग व एक्सट्रा एब्ज़ॉर्पशन वाले नैपकिन का इस्तेमाल करें। अगर फ्लो हल्का है तो सामान्य नैपकिन यूज करें।
 

2. मेंस्ट्रुअल ब्लड
ब्लड बाहर निकलने के बाद बाहरी जीवाणुओं के संपर्क में आता है, जिस वजह से ब्लड में संक्रमण हो जाता है। इस तरह की स्थिति उस दौरान भी होती है, जब खून का बहाव न के बराबर होता है। दरअसल, इस समय पैड पर नमी, जीवाणु और पसीने के कण पनपने लगते है। लंबे समय तक नमी और गर्मी में रहने के कारण इनकी संख्या बढ़ने लगती है, जिस वजह से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफैक्शन, वजाइनल इंफैक्शन और स्किन पर रैशेज नजर होने का खतरा बढ़ जाता है।
 

3. वजाइनल रीजन
इन दिनों खून अक्सर वजाइनल रीजन में जमा हो जाता है, जिसे कुछ समय बाद साफ करते रहना ही बेहतर है क्योंकि ऐसा न करने से रीजन में बदबू हो सकती है। इसलिए अक्सर पैड बदलते समय जेनिटल्स को जरूर धोएं। अगर पानी के साथ नहीं धोना चाहते है तो टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करें।
 

4. क्लीनिंग मेकैनिज्म
वजाइना अपना ही एक क्लीनिंग मेकैनिज़्म होता है, जो बैड और गुड बैक्टीरिया के बीच संतुलन बनाएं रखता है। अगर आप इसको साबुन से धोते है तो गुड बैक्टीरिया खत्म हो जाते है, जिससे इंफैक्शन बढ़ जाती है। ध्यान रखें कि वजाइनल एरिया को साफ करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें क्योंकि इससे सभी बैड बैक्टीरिया खत्म हो जाएंगे।
 

5. एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट
पैड के कारण होने वाले रैशेज से बचना चाहिए। लंबे समय तक पैड गीला रहने से वह त्वचा से रगड़ खाता है। इसलिए अपना जेनिटल एरिया  ड्राई रखने की कोशिश करें और पैड बदलते रहें। रैशेज़ हो भी जाते है तो सोने से पहले और नहाने के बाद वजाइनल एरिया पर एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट लगाएं।
 

6. मेडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल

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अगर रैशेज बहुत ज्यादा है तो जेनिटल एरिया को ड्राई और इंफैक्शन मुक्त रखने के लिए मेडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल करें। इसको इस्तेमाल करने से पहले गायनिकोलॉजिस्ट की सलाह जरूर लें।
 

7. रोजाना नहाएं

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कुछ लोगों की मान्यता है कि पीरियड्स के दिनों में न ही नहाना और बाल धोने चाहिए। यह बिल्कुल सही नहीं है। दरअसल, पीरियड्स के दिनों अगर न नहाया जाए तो शरीर को नुकसान भी हो सकता है।
 

8. सैनिटरी पैड का कैसे करें चयन 
सैनिटरी पैड वहीं अच्छा होता है, जो कम समय में ज्य़ादा से ज्य़ादा नमी सोखने की क्षमता रखता है। वहीं अवशोषित नमी को पैड के सेंट्रल कोर में लॉक होना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड का तेज फ्लो भी लीकेज नहीं हो पाता। आमतौर सैनिटरी पैड्स दो तरह के होते है- डे पैड्स और नाइट पैड्स। जहां डे पैड्स की लंबाई 17 से 25 सेंटीमीटर तक होती हैं, वहीं नाइट पैड्स 35 सेंटीमीटर या फिर अधिक लंबाई वाले होते हैं।सैनिटरी नैपकिन का मटीरियल ब्रीदेबल होना चाहिए।


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