B'Day Special: अपमान समझ सितारा देवी ने ठुकरा दिया था पद्म भूषण, ये थे उनकी जिंदगी के दिलचस्प किस्से

Wednesday, November 8, 2017 1:05 PM
B'Day Special: अपमान समझ सितारा देवी ने ठुकरा दिया था पद्म भूषण, ये थे उनकी जिंदगी के दिलचस्प किस्से

सितारा देवी को कथक क्वीन कहा जाता है, जिसे गूगल ने डूडल के जरिए उनके 97वें जन्मदिन पर श्रद्धांजलि दी है। आपको गूगल पर उनका चित्र भी देखने को मिल जाएगा। सितारा देवी भारत की सबसे प्रसिद्द कथक नृत्यांगना थीं, जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। आज हम आपको उन्हीं के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताएंगे, जिन्हें आप भी जानने के इच्छुक होंगे। 


-सितारा देवी का जन्म 8 नवम्बर, 1920 को कोलकाता में हुआ था।
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- असली नाम था धनलक्ष्मी लेकिन प्यार से बुलाते थे धन्नों। 

- बचपन में ही माता-पिता ने एक दाई को सौप दिया था। 

- सितारा देवी का चेहरा थोड़ा टेढ़ा था, जिसके चलते माता-पिता ने उन्हें दाई को सौप दिया। 

- जब सितारा 8 साल की हुई, तब माता-पिता ने उनका चेहरा पहली बार देखा। 

- बचपन में कर दी गई उनकी शादी। 

- बढ़ने का शौंक था लेकिन ससुराल वालों ने नहीं दिया पढ़ने। 

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- शादी टूटने के बाद सितारा ने स्कूल में लिया दाखिला। 
 
-सत्यवान और सावित्री की पौराणिक कहानी पर आधारित एक नृत्य नाटिका में लिया हिस्सा। 

- नृत्य के लिए अखबार में छिपा नाम और वहीं से मिली प्रसिद्धी और यहीं उन्हें सितारा देवी नाम मिला।  

- शंभु महाराज और पंडित बिरजू महाराज के पिता अच्छन महाराज से भी ली नृत्य की शिक्षा।

- नृत्य में इतना मशगूल हो गईं कि छोड़ दी पढ़ाई। 

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- 11 साल की उम्र में परिवार के साथ मुंबई आ गईं।

- वहां आकर अपना पहला नृत्य जहांगीर हॉल के सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रस्तुत किया। काफी प्रसन्ना हासिल की। 

- भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान देना तय किया लेकिन सितारा देवी ने पद्म भूषण को दिया ठुकरा। 

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- पद्म भूषण न लेते हुए कहा ‘यह मेरा सम्मान नहीं अपमान है। मैं भारत रत्न से कम नहीं लूंगी।’

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